Tuesday, 5 June 2012

पहली मुलाकत

लोगो की भीड मै वो मेरे सामने आई
ये पहली मुलाकत मेरी ज़िन्दगी को नसीब हुई
हुम दोनो बस कुछ पल चुपचाप एक दुसरे को देखते रहे
मानो वक़्र्त थम सा गया हो,हवा चलना बन्द हो गया हो
उसे देख दिल मै एक अजीब सी खुशी हुई
उसके सामने सा ,उसके होने का एह्सास किया
उसे छु दिल को एक सुकद तसल्ली हुआ
दोनो कि नज़र बस एक दुसरे से बाते किया
दिल तो मानो आज सातवे आसमान पर हो
दिमाग तो मानो आज सुन्न सा हो गया हो
दिल की तेज़ धङ्कन अब सुनाई दी
हाथ रख कर उसे चुप कराना पङा
ये पहली मुलाकत दिल को भा गैइ
हाथ उसका पकङ मैने उसे भरोसा दिया
अपने होने का उसे एह्सास दिया
वो बेफ़्रिक हो मानो हवा मै उङ्ने लगी
उसके मुस्कराने से हर जगह रोशनी हो ग़यी
मै उस वक़्त हर पल को जिता रहा
अपने पयार को खुश देख ये कह्ता रहा
है पहली मुलाकत हुमारी यादगर है
हर एक पल ज़िन्दगी का खुशनुमा मुकाम हो
एक खुबसुरत सा फुल उसे दे, प्यार का स्वागत किया
वो अपने बालो मै लगा, उसने मेरा मान रखा
वक़्त गुज़रता रहा , हुम एक दुसरे मै खो से गये
उस शोरगुल मै भी अजीब शांति का एहसास हुआ
बस डर सा था पहली मुलाक्त के गुज़रने का
अपने हाथो से उसके हाथ के दुर जाने का
उसकी खुशबू जो हवा मै घुल सी गयी थी,उसके खतम होने का
आखिर वो वक़्त आ गया अलविदा कह्नने का
तभी अपने हाथो मै कुछ पानी के बुद
मेने सोचा यह बरसात का मौसम कैसे आया
तब मैने प्यार कि आँखों मैन आँसु पाया
ना कुछ बोल पया, उसकी सादगी पर दिल थम गया
मेने बोला ना व्य्रथ करो आँसु , तुमे बस खुश रहना है
तुम्हारी इस खुशी मै मेरी ज़िन्दगी कि जीत है
ये पहली मुलाकत तो बस एक आगाज है
हमारे सपने को बस पुरा करने का वक़्त है
मेरी ज़िन्दगी से तुम बस दुर ना होना
ये पहली मुलाकत को मेरी याद ना बना देना
ज़िन्दगी को तन्हा उमर मै जी नही सकता
अब भी इस याद को दिल मै लिये खुश रह्ता हु
वक़्त के साथ ज़िन्दगी जीना सिख गया हु
                                                                                                                                         अभीजीत कुमार

इन्तज़ार

वक़्त के आगाज पर चला जाता हु मै
मुसाफ़िर बनकर राहो से मिल जाता हु मै
यु तो हर सफ़र का मुकाम मिलता नही
इन्तज़ार कर राह को उम्रर लौटाता हु मै
ऐसे ही किसी राह पर एक राही मिला
उसे अब आगे ना जाने का साहस हुआ
मैने रुक उसे कुछ बताना चाहा
पल भर मै ही गायब हो गया
सुनसान से ज़िन्दगी मै कुछ पल ऐसे आते है
जब कदम पीछे हट जाते है,ना चाहते हुए भी रुक जाते है
एक डर सा बैठ जाता है, दिलो-दिमाग मै
तब अपना साया भी पराया सा लगता है
खुद को होसला दे , मैने इन्तज़ार किया
वक़्त के हवाले अपने ज़िन्दगी का फेसला दिया
पर देखो  वक़्त कि बेरुखी ,बस
खफा मुझसे हो, और हर किसी का साथ दिया
येह इन्तज़ार मुझे कुछ मँहगा पड गया
हर कुछ मेरे हाथ से निकलता चला गया
मैने वक़्त से बस इतना सा पल माँगा
अपनी ज़िन्दगी की खुशी को देखने का नसीब माँगा
ऐसा ना था कि मै आगे बढ्ता नही
उसे पाने के लिये इन्तेज़ार करता नही
येह तोह बस मेरि ज़िन्दगी क सच था
जिसे मै झुठ बना सकता नही
समय मानो रुक स गया,एक मन्जिल पर नज़र जा मिला
कुछ गुजरे हुए पल सामने आ गया
अपने को ही खुद से यकीन सा हट गया
वो एक इमारत खडा मानो मुझ पर हस रहा है
हर लोग मुझसे गुस्से से देख रहे है
ये हवा भी मानो मुझसे खफा हो गया हो
ये क्या गल्ती है मेरी जिसकी सजा येह मुझसे मिली
इन सवालो को लिये मै आगे चल रहा हु
इन्तेजार है मुझसे अब हर एक जवाब का
इन्तेज़ार है , आज का और आने वाले कल का
इन्तेज़ार है, गम के जाने के और खुशी के आने का
इन्तेज़ार है, अपने नज़रो मै सुकुन पाने का!!!!

                                                                                                                                         अभीजीत कुमार

तन्हा दिल

तन्हा दिल लिये प्यार कि तलाश मै निकला
एक चेहरा आँखो मै लिये,किसी को खोजने निकला
हर राह पर एक हसीन सपना को बनाने
तन्हा हि उसे पुरा करता रहा
अजीब सी कशमकश पाल लिया दिल मै
दुर जाते हुए भी उसके पास आते रहा
सोचता हुआ कि गम ना मिले फिर कभी
प्यार को पास रख्नने की सज़ा ना मिले कभी
तेरी रोशनी मै भी अभी देख लेता हु
तुझे मह्सुस कर तेरे पास आता हु
पता ना होता है इस दीवाने को कि तु है ही नही
तेरी रुह को फिर से ज़िन्दा करवाने आया हु
एक मुराद थी , जो सुना था तेरे दिल मै
हाथ तेरा पकड चलता रहा भीड मै
जब आँख खोला तो तु थी कही और खडी
पास आया तो तु ओझ्ल हो गई
बस एक खत हाथो मै दे  गई
आँखों कि रोशनी भी दुर चली गई
आज भी खत रखा हु तेरी याद मै
तन्हा दिल लिये प्यार कि तलाश निकला
तुझे पाने कि मुराद अब भी ज़िन्दा है
तेरे साथ ज़िन्दगी जीने कि तमन्ना है
तेरि खुशी मै अब खुश रह लेता हु
पर तेरी बेरुखी का मै शिकार हुआ
तन्हा हि इध्रर उधर रहने को तैयार हुआ
अपनी मौत को आँखो से देखता रहा
मौत के बाद भी मेरी रुह तड्पती रही
तुझे खोजने फिर से तन्हा निकलना पडा
जब तु मेरे सामने आई,तुझे छु ना सका
तेरी हसी मै अपना ग़म छुपाता रहा
एक दिवाना ऐसा जो अभी तक वापस ना आया
गुम हो गया, अँधेरे कि दुनिया मै
चाहत का बसेरा, एक भयानक सपना हो गया
तन्हा दिल लिये अब तलाश खतम हुआ
आसमान मै किसी एक कोने मै एक बसेरा मिला
रात मै चमकता तुझे देखता रहा
दिन होते ही, अपने मौत के साथ गायब हुआ                                                                                                                                          अभीजीत कुमार

रात

रात का रंग दिन से होली खेल आया है
हर किसी को अन्धेरा मै डुबा लाया है
जिधर भी देखो उधर हि सन्नाटा है
दुर तक बस गम का साया है
रात क रंग मेरे पास भी आया है
चंद्र के सन्ग मैने उसे तड्पाया है
आसमान के साथ मैने अपने आप को छुपाया है
पहेली जैसा येह सवाल रात के पास आया है
हुम उनसे कुछ ना पुछे येह रात की माया है
दुर होकर उनको देखे येह ज़िन्दगी की छाया है
आज भी इन्तेज़ार है रात के आने का
रात के साथ कुछ पल बिताने का
एक दिन दिन मै ग्रहन लगा
आजनक से अन्धेरा हो गया
बस चार पल के समय मै
दिन रात को दुर ले चला गया
मै चुपचाप कुछ ना कर सका
बस अपनी बेबसी पर हसता रह गया
आसमान से अब येह सवाल करता रहा
तुने दोनो क साथ क्यु दिया
रात का रंग दिन से होली खेल आया
उस रंग मै अपने आप को भुल गया
बस सन्नाटा के इस दुनिया मै तनहा अकेला रह गया!!!!

                                                                                                                                      अभीजीत कुमार

मेरी ज़िन्दगी

मै तब बहुत खुश था जब मेरा प्यार ज़िन्दगी थी
तब हर पल के बितने का इन्तेज़ार नही किया करता था
उस समय अपने आप से बात किया करता था
अपनी ज़िन्दगी को खुश करने का, कोशिश किया करता था
बस एक सपना था, उसे अपना बनाने का
और एक घर जिसका हर रंग अपना हो
मुझे ज़िन्दगी पर पुरा बिस्वास था
कुछ तो था,जिसे मै ज़िन्दगी के पास-पास था
मेरी ज़िन्दगी कि मुस्कान बहुत पयारी थी
उसके सामने गम का कुछ पता नही चलता था
और मै अपनी ज़िन्दगी मै डुबता चला गया
रेह रेह कर वो मुझे याद आती थी
ना जाने क्या हुआ एक भँवर सा आ गया
ज़िन्दगी को दुर उडा कही और ले गया
मै रेगिस्तान पर अकेला तन्हा सा रेह गया
चलते चलते मै बहुत दुर चला गया
मेरे ज़िन्दगी को कुछ नये रंग मिल गये
जिसका नाम मेरे जुबान से जाता नही था
आज वही नाम मेरे दुस्मन बन गये
लम्बी ज़िन्दगी का फ़ासला बहुत मुस्किल लगता है
भुल गयी ज़िन्दगी जिसे मैने प्यार किया
भुल गया ज़िन्दगी जिसे मैने अपना नाम दिया
मेरे नफ़्ररत कि वजह मेरी ज़िन्दगी है
मेरी मौत कि वजह भी मेरी ज़िन्दगी है
पागलो कि तरह ज़िन्दगी जीना कबूल नही
आवारो की तरह भटकना कबूल नही
रात को जागते हुए किसी का इन्तेज़ार कबूल नही
उसके याद को दिल से मिटाना कबूल नही
गम का प्याला पिते पिते थक सा गया
टुटे हुए दिल के साथ ज़िन्दगी जीना सिख गया
मौत को आँखो से लगाकर , अब सो रहा हू
आज भी इन्तेज़ार करता हु अपनी ज़िन्दगी का
क्युन्की प्यार कि दुनिया मै हार के भी जीत गया हु

                                                                                                                                         अभीजीत कुमार

याद

तेरी याद मै ज़िन्दा हु, मै कुछ इस तरह
जैसे अपनो से पराया हु, मै कुछ इस तरह
हर तरफ से तेरी याद तड्पाती है, मुझे कुछ इस तरह
समुन्दर से लहर आती हो जिस तरह
तेरे जाने से हर कुछ बदल सा गया
हर गली सुन्सान सी लगने लगी
अब हवाओं के चलने से सहम जाता है दिल
मानो ज़िन्दगी जीने का नशा उतर गया हो
तेरे जाने से हर कुछ बदल सा गया
आज भी तेरी तस्वीर उतना ही सुकुन देती है
फिर से पुरानी यादो का पुलिन्दा लोटा देत्ती है
कब तक इन्तेज़ार करु अपने अन्जाम का
कि गम भी खेलती हो खुशी से कुछ इस तरह
रात भी मानो हसती हो मुझ पर
और अन्धेरा मै मेरा चेहरा दिखा जाती हो
क्या गलती थी मेरी ए याद , मुझे इतना तो पता
तुझे मनाने का कुछ राश्ता तो पता
तु अब भी मेरे साथ है , मेरे पास है
यादगार है, अब भी तेरी हर याद हर बात
लौट के आ जा, मेरी ज़िन्दगी मै कि
देर ना हो जाये कुछ इस तरह
मै ना रहु याद बनाने को दोबारा
हर कोइ मुझेसे येही कहता भुल जा यादों को
उन यादों मै रखा क्या जो बदल गया हो
फिर भी मेरा दिल तुझे भुलता क्यु नही
रेहम खा मुझ पर ए ज़िन्दगी मुझे मौत का राश्ता ना दिखा
अपनी याद से मुझे मिलना है जरुरी
अपनी तस्वीर को पाना है जरुरी
मुझे खफा है मेरे घर का आइना
इस आइना को अपनी तस्वीर लौटाना है जरुरी
याद है तेरी याद जो मुझे ज़िन्दा रखा है
येही याद तेरी याद मै , छुपा है कुछ इस तरह
मानो बचपन छुपा हो, बुज़ुर्ग मै जिस तरह
आन्खे थक गइ है, तेरा राश्ता देखते हुए
लौट के आजा ए याद तेरा याद है अब भी वोहि
है वही दिल जिसे तुने धडकन दी थी
वही अन्धेरा जिसे तुने प्रकाश दी थी
बिस्वास ना हो याद तो तु अपनी याद मै जा
उन यादो मै एक नाम है, जो तुझे याद कर पल पल जीता और पल पल मरता है

                                                                                                                                         अभीजीत कुमार

गम

गम


खुशी और गम का साया साथ साथ था
जब जयादा खुशी हो, तब गम का हल्का सा दवा था
उस खुशी  मै , गम का अपना एक अलग मजा था
आज गम ने एक काम किया, खुशी का काम तमाम किया
गम ने दिल मै दुनिया बसा लिया
जम को खुश करने का, मैने भी राश्ता निकाल लिया
हर नशा का साथ धीरे धीरे निभाता चला गया
और नशा के साथ धीरे धीरे गिरता चला गया
याद ताज़ा रहता है, इस नशे के पागलपन से
सिगरेट का जलन , दिल को सुकुन देता है
इसकी धुआ मेरी साँसो मै घुल जाता है
हर एक धुआ मै गम की तसवीर उफ़र जाती है
फिर गम का धुआ , आसमान मै उडते हुए गायब हो जाता है
फिर येह भी साथ छोड जाता है
पर अपना नशा दिल मै छोड जाता है
कभी खुशी और गम का साया साथ साथ था

खुद को भुल जाना है दुनिया का सबसे बडा गम
और येह ग़्म मै हर धुंआ मै पीता हु
सुना है रो लो, तो गम कम हो जाता है
आसु ही नही निकलता है, येही तो गम बन जाता है
तु जब थी तो गम का नामो-निशान ना था
बस एक ही नशा तेरे प्यार का हुआ करता था
आज तु नही है तेरी याद ही एक गम है
और उस याद को याद करना ही मेरा गम है
                                                                                                                                         अभीजीत कुमार